लुधियाना-फरीदकोट : सरबत खालसा द्वारा श्री अकाल तख्त साहिब के नियुक्त किए गए कार्यकारिणी जत्थेदार और बरगाड़ी इंसाफ मोर्चे के प्रमुख पूर्व सांसद भाई ध्यान सिंह मंड ने पंजाब के मुख्यमंत्री द्वारा बहिबल कलां बेअदबी कांड की जांच सीबीआई हवाले करने और मोर्चे की तीनों मांगों के बारे में कोई भी स्पष्ट घोषणा ना किए जाने की सख्त आलोचना करते हुए कहा कि जब तक सरकार बरगाड़ी में आकर सिख पंथ की तीनों मांगों के बारे में स्पष्ट ऐलान नहीं करती, तब तक यह मोर्चा जारी रहेंगा।
उन्होंने कहा कि बरगाड़ी धरने में आए पंजाब सरकार के मंत्रियों को भी हमने स्पष्ट कर दिया था कि जस्टिस रंजीत सिंह कमीशन की रिपोर्ट सार्वजनिक होने और बेअदबी मामलों के आरोपियों को पकडऩे समेत बहिबल गोलीकांड के लिए जिम्मेदार अधिकारियों के विरूद्ध कार्यवाही और सिख बंदियों की रिहाई की स्पष्ट घोषणा की जाएं। उन्होंने कहा कि पिछले दिनों बेअदबी कांड के कुछ चुनिंदा दोषियों के पकड़े जाने के बाद सच्चाई सामने आ चुकी है परंतु सरकार पता नहीं किस मजबूरी के तहत उसपर पर्दा डालने की रस्म अदायगी कर रही है।
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ध्यान सिंह मंड ने यह भी कहा कि बरगाड़ी की सरजमीं पर साहिब श्री गुरू गं्रथ साहिब जी की बेअदबी की शुरूआत 3 साल पहले हुई थी और यहां ही पंचायत बैठेंगी और फैसला भी पंचायत ही करेंगी। उन्होंने सरकार को चेतावनी देते कहा कि सिहासन वाली कुर्सी लोग ही देते है और यह नीचे खिसकते देर नहीं लगती। तख्त श्री दमदमा साहिब-तलवंंडी साबो के जत्थेदार भाई बलजीत सिंह दादूवाल ने भी बहिबल गोलीकंाड में तीन साल पहले शहीद हुए दो सिख नौजवानों के पारिवारिक और घायल हुए सिखों के वारिसों को करोड़ों रूपए का मुआवजे का ऐलान करने पर प्रतिक्रिया देते हुए स्पष्ट किया कि तथाकथित पंथक आगु बादल और बादल समर्थकों के मुंह पर कैप्टन अमरेंद्र सिंह ने चपत मारी है।
भाई बलजीत सिंह दादूवाल ने कहा कि रंजीत सिंह कमीशन को जो लोग कांग्रेसी कमीशन कहकर रदद करते आ रहे है, उसी कमीशन ने शहीद परिवारों को 75-75 लाख और दो अपाहिज हो चुके सिखों को 35 और एक को 40 लाख देने की सिफारिश की थी, उसने ही कैप्टन सरकार को सिखों का भरोसा जीतने के लिए 10-10 लाख रूपए राहत देने की सिफारिश की थी। उन्होंने कहा कि जिस बादल के राज में धनगुरू ग्रंथ साहिब जी की बेअदबी का इंसाफ मांग रहे सिंहों को गोलियां मारकर शहीद और जख्मी कर दिया था और पंथक बादल ने अज्ञात पुलिस कहकर मामला रफा- दफा करने की कोशिश की थी।
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जबकि बादल ने अपने ही बनाए जांच कमीशन जस्टिस जोरा सिंह की रिपोर्ट दबा दी थी। दादूवाल ने कहा कि पंथ विरोधी बादल गुरू सिखी का प्रचार प्रसार करने वालों को झूठे मुकदमे बनाकर जेलों में बंद करते रहे है, अब जान से मारने की साजिशें रचाते है। यह सच सामने आना चाहिए कि इसमें कौन-कौन हिस्सेदार था। दादूवाल ने यह भी कहा कि अब जल्दी ही कैप्टन सरकार विशेष विधानसभा सत्र बुलाकर बरगाड़ी कांड के बारे में कमीशन की समस्त रिपोर्ट जगजाहिर करें ताकि लोगों का भरोसा इंसाफ पर हो सकें।
स्मरण रहे कि जत्थेदार भाई ध्यान सिंह मंड की रहनुमाई में चल रहा इंसाफ मोर्चे का आज 60वां दिन है। इस दौरान देश-विदेश के अलग-अलग हिस्सों से सिख संगत इंसाफ की खातिर बढ़चढ़ कर हिस्सा ले रही है।
सुनीलराय कामरेड
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