चंडीगढ़ : यौन उत्पीडऩ प्रकरण में मुख्य गवाह पर हमले के मामले के मामले में नारायण साई की नियमित जमानत की मांग पर मंगलवार को हाईकोर्ट में लगभग एक घंटा की बहस चली जिसमें हरियाणा सरकार ने कोर्ट से मांग की कि वह नारायण साईं किसी भी सूरत में जमानत ना दे। हरियाणा सरकार ने हाई कोर्ट को बताया कि मुख्य गवाह चावला पर हमले का आरोपी साफ कह चुका कि उसको नारायण साईं उसको मारने के लिए हायर किया था। ऐसे में अगर नारायण साईं को जमानत दी जाती है तो वह मामले को प्रभावित जाती है तो वह मामले को प्रभावित कर सकते हैं।
हरियाणा सरकार ने हाई कोर्ट में दायर जवाब में कहा कि नारायण साई व पर कुल 9 मामले चल रहे हैं । इस पर कोर्ट ने हरियाणा सरकार को कहा कि वो उन सभी मामलों की जानकारी कोर्ट में दे जिसमें नारायण साई मुख्य आरोपी है। कोर्ट ने सरकार को तीन सप्ताह का समय देते हुए मामले की सुनवाई स्थिगत कर दी। कोर्ट में ट्रायल कोर्ट को भी इस मामले में तेजी लेने का निर्देश दिया। पिछले महीने सुनवाई पर नारायण साई के वकील के पेश न होने पर हाईकोर्ट ने पुरा रिकार्ड तुंरत ट्रायल कोर्ट पानीपत को वापिस भेजते हुए ट्रायल कोर्ट को छूट दे दी थी कि वो कानून के हिसाब से मामले पर निर्णय लेने में स्वतंत्र हैं। अभियोजन पक्ष के अनुसार आसाराम के बेटे नारायण साई ने दो बहनों का यौन शोषण किया था। इस मामले में पानीपत निवासी महेंद्र चावला को मुख्य गवाह बनाया गया था।
हरियाणा पुलिस ने चावला को सुरक्षा भी मुहैया करवाई थी। इस दौरान पिछले साल 13 मई को बाइक सवार दो अज्ञात युवक चावला के घर में घुस गए और फायरिंग कर फरार हो गए। इस घटना में महेंद्र चावला घायल हो गए और उन्हें अस्पताल में भर्ती करवाया गया। पुलिस को दिए बयान में चावला ने आसाराम और उसके बेटे नारायण साईं के खिलाफ हमला करवाने का आरोप लगाया। उसने कहा कि बाप व बेटा नहीं चाहते कि वह उनके खिलाफ कोर्ट में गवाही दे। इसी मामले में याचिका दाखिल करते हुए नारायण साईं ने कहा कि यौन उत्पीडृन मामले में गवाह महेंद्र चावला पर हमले के मामले में उन्हें फंसाया गया है। इस मामले से उनका कोई लेना-देना नहीं है। इसलिए उन्हें रेगुलर बेल दी जाए।
…अब तेरा क्या होगा नारायण साईं, आज कोर्ट में पेशी
(आहूजा)
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