मराठा समुदाय को आरक्षण देने से संबंधित बहुप्रतीक्षित विधेयक को गुरुवार को महाराष्ट्र विधानसभा के पटल पर रखा गया और मराठा आरक्षण विधेयक सर्वसम्मति से पारित हुआ। महाराष्ट्र सरकार ने ‘सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़ा’ श्रेणी के तहत मराठा समुदाय के लिए 16 प्रतिशत आरक्षण का प्रस्ताव दिया। मराठा आरक्षण के लिए विशेष कैटेगरी SEBC बनाई गई है।
महाराष्ट्र में 76 फीसदी मराठी खेती-किसानी और मजदूरी कर जीवन यापन कर रहे हैं। वहीं सिर्फ 6 फीसदी लोग सरकारी-अर्ध सरकारी नौकरी कर रहे हैं। एक सरकारी सूत्र ने बताया कि उक्त विधेयक के साथ ही राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग (एसबीसीसी) की मराठा आरक्षण से जुड़ी अनुशंसाओं पर उठाए गए कदमों के बारे में दो पन्नों की कार्रवाई रिपोर्ट (एटीआर) को भी पटल पर रखा जाएगा।
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इस मुद्दे पर राजस्व मंत्री चंद्रकांत पाटिल की अध्यक्षता वाली राज्य मंत्रिमंडल की उप समिति की बैठक बुधवार शाम को हुई। पाटिल ने बुधवार को महाराष्ट्र विधानसभा परिषद में कहा था कि विधेयक को पारित कराने के लिए जरूरत पड़ने पर राज्य विधानसभा के शीतकालीन सत्र की अवधि बढ़ाई जा सकती है। वर्तमान कार्यक्रम के मुताबिक 19 नवंबर को मुंबई में शुरू हुआ शीतकालीन सत्र 30 नवंबर को समाप्त होगा।
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