नई दिल्ली : ऑनलाइन दवा खरीदने वाले लोगों के लिए एक अच्छी खबर है। सरकार जल्द ही इन कंपनियों पर नकेल कसने जा रही है। इसके लिए सरकार ने ई- फॉर्मेसी के ड्राफ्ट रूल तय कर दिए हैं। इसके बाद ये कंपनियां खुद को प्लेटफार्म बताकर पल्ला नहीं झाड़ सकेंगी और उन्हें भी तमाम नियमों का पालन करना ही पड़ेगा। हालांकि इस ड्राफ्ट पर अगले 45 दिनों तक सरकार लोगों और सभी स्टेक होल्डरों के सुझाव लेगी। इसके बाद यह कानून का रूप लेगा।
जानकारी के अनुसार पिछले कुछ समय से सरकार को लगातर शिकायत मिल रही थी कि ई- फॉर्मेसी के नाम पर दवा बेचने वाली कई कंपनियां मनमानी कर रही थीं। ग्राहकों को न तो तय समय में दवा ही मिल रही थी और कंपनी की गलती पर कोई उनकी शिकायत लेने वाला भी नहीं था। ऐसे में एक बार दवा खरीदने के बाद ग्राहक खुद को ठगा हुआ महसूस करता था। इसे देखते हुए सरकार ने इन सभी ऑनलाइन दवा बेचने वाली कंपनियों की जिम्मेदारी तय करने का मन बनाया है।
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जानकारी के अनुसार इस गाइडलाइन के तहत अब किसी भी कंपनी को ऑनलाइन दवा बेचने से पहले केंद्रीय और राज्य ड्रग कंट्रोल ऑफिस से लाइसेंस लेना जरूरी होगा। इसके लिए इन कंपनियों की अपनी खुद की खुदरा दवा दुकान होनी जरूरी होगी। अब इन कंपनियों को तय समय में ही ग्राहकों तक दवा पहुंचानी होगी। वहीं दवा को वापस करते समय ये कंपानियां आनाकानी नहीं कर पाएंगी। इसके साथ ही अगर दवा नकली या घटिया पाई गई तो इन पर ड्रग एंड कॉस्मेटिक एक्ट के तहत कार्रवाई भी की जा सकेगी। इसके साथ ही इन कंपनियों को सप्ताह के सातों दिन 12 घंटे कॉल सेंटर भी चलाना होगा। वहीं इस कॉल सेंटर पर बैठने वाले व्यक्ति के लिए भी रजिस्टर्ड फार्मासिस्ट होना जरूरी होगा।
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