नई दिल्ली : पटना से भाजपा सांसद एवं फिल्म स्टार शत्रुघ्न सिन्हा को आभास हो चुका है कि भाजपा उन्हें टिकट नहीं देगी। पिछले तीन वर्षों में जिस तर्ज पर शत्रु ने अपने ही दल पर लगातार कटाक्ष किए उससे आम चर्चा पहले से ही चल रही है कि भाजपा अब लोकसभा चुनाव में उन्हें भाव नहीं देगी। राजनीतिक हल्कों में चर्चा यह भी है कि क्या आप के टिकट पर शत्रुघ्न सिन्हा को दिल्ली से प्रत्याशी बनाने का गणित आप के मुखिया अरविन्द केजरीवाल बैठाना चाहते हैं? दिल्ली भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष एवं सांसद मनोज तिवारी के सामने केजरीवाल का प्रयास है कि शत्रुघ्न सिन्हा को उतार कर चुनावी दंगल में उबाल लाया जाए। इस लोकसभा सीट पर बिहार व यूपी की आबादी ज्यादा है तथा दोनों फिल्म अभिनेता भी हैं जिससे मुकाबला रोचक हो सकता हैं।
पिछले दिनों शत्रुघ्न सिन्हा दिल्ली में आप के मुखिया केजरीवाल के न्यौते पर आए थे। शत्रु ने तब भी भाजपा के प्रति नाराजगी जतायी तथा आप की भूमिका का महिमा मंडन किया था। शत्रुघ्न सिन्हा व केजरीवाल के मध्य गुपचुप क्या चर्चा हुई कयास लग रहे हैं कि केजरीवाल ने लोकसभा की 100 सीटों पर उम्मीदवार उतारने की घोषणा की थी समझा जा रहा हैं कि इस सूची में शत्रुघ्न का नाम भी दर्ज हो सकता हैं। उल्लेखनीय है शत्रुघ्न सिन्हा के लिए दिल्ली राजनीतिक हिसाब से शुभ साबित नहीं हुई थी। शत्रु ने नयी दिल्ली लोकसभा सीट से भाजपा टिकट पर चुनाव लड़ा था। कांग्रेस ने फिल्म स्टार राजेश खन्ना को उतारा था नई दिल्ली की सीट पर राजेश खन्ना ने तब बाजी मारी थी। इसके समानांतर ये भी चर्चा हैं कि शत्रुघ्न सिन्हा भाजपा के खिलाफ पटना से ही पुनः दाव खेल सकते हैं। आप के अलावा लालू प्रसाद यादव की पार्टी राजद भी उन्हें प्रत्याशी घोषित कर सकती हैं।
आम चुनाव पर बोले शत्रुघ्न सिन्हा – भाजपा का सदस्य हूं, अनुशासित सिपाही की तरह आज्ञा का करूंगा पालन
किसी से छुपा नहीं हैं कि शत्रुघ्न सिन्हा जब से भाजपा की खिलाफत पर उतरे तब से लालू प्रसाद यादव के साथ भी ताल्लुकात मीठे रखने का प्रयास किया। शत्रुघ्न की पार्टी के भीतर रहते भाजपा उच्चकमान के प्रति आक्रामक शैली से लालू सहित कई विपक्षी नेता खुश भी हैं तथा शत्रु को भाव देते रहे। शत्रुघ्न सिन्हा ने सदा ये कहा कि वह दल के साथ हैं। खुद अलग नहीं होंगे जब कि कटाक्ष ऐसे किए कि संघ भी रुठने लगा हैं। भाजपा उच्च कमान ने शत्रुघ्न को पार्टी से चलता इसलिए नहीं किया कि कहीं उन्हें शहीद बनकर सहानुभूति बटोरने का कार्ड खेलने का मौका न मिल जाए। बहराल चर्चा यह भी है कि शत्रुघ्न राजद अथवा आप दोनों में से किसी भी दल के रथ का सवार बन सकते हैं?
(दिनेश शर्मा)
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