Saturday, September 1, 2018

बेटियां गोल्ड से चूकीं, मिला रजत

जकार्ता : भारतीय महिला हॉकी टीम यहां 18वें एशियाई खेलों में 36 साल पुराने मिथक को तोड़ने में असफल रही और उसे फाइनल में जापान से 1-2 से हारकर रजत पदक से संतोष करना पड़ा। इस हार से भारतीय महिला टीम को काफी दुख होगा क्योंकि यहां एक स्वर्ण पदक से उन्हें सीधे 2020 तोक्यो ओलंपिक में प्रवेश मिल जाता। मिनामी शिमिजु और मोटोमोरी कावामुरा ने पेनल्टी कार्नर से क्रमश: 11वें और 44वें मिनट में गोल किये जबकि नेहा गोयल ने भारत के लिये 25वें मिनट में मैदानी गोल किया। भारतीय टीम 1982 के बाद एशियाई खेलों में पहला स्वर्ण पदक हासिल करना चाहती थी।

भारतीय टीम ने सेमीफाइनल में चीन को हराकर 20 साल के अंतराल बाद फाइनल के लिये क्वालीफाई किया था। ओलंपिक से पहले जापान की हाकी टीम सही दिशा में आगे बढ़ रही है और महिला टीम ने एशियाई खेलों में पहला खिताब जीता जबकि वह तीन बार उप विजेता रह चुकी है। भारतीय हाकी के लिये यह काफी निराशाजनक रहा क्योंकि कल पुरूष हाकी टीम अपने स्वर्ण पदक का बचाव करने में असफल रही और सेमीफाइनल में मलेशिया से हार गयी। मैच में भारतीय टीम खिताब जीतने की प्रबल दावेदार थी क्योंकि वह विश्व रैकिंग में नौंवे स्थान पर काबिज जापान से पांच स्थान ऊपर थी। पहले क्वार्टर में भारत ने विपक्षी सर्कल में काफी सेंध लगायी लेकिन खिलाड़ियों में फिनिशिंग टच की कमी दिखी।

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उन्हें चौथे मिनट में अच्छा मौका मिला जब नवनीत कौर कप्तान रानी रामपाल के पास का फायदा नहीं उठा सकीं। जापान को आठवें मिनट में मौका मिला लेकिन भारतीय गोलकीपर सविता ने अच्छा बचाव किया। नवनीत ने भारत को 10वें मिनट में पहला पेनल्टी कार्नर दिलाया लेकिन ड्रैगफ्लिकर गुरजीत कौर जापानी गोलकीपर को नहीं पछाड़ सकी। जापान को पहला पेनल्टी कार्नर 11वें मिनट में मिला जिस पर शिमिजु ने गोल में तब्दील किया। एक गोल से पिछड़ने के बाद भारतीय टीम ने आक्रमण जारी रखा लेकिन उसमें पैनेपन की कमी दिखी। भारत ने दूसरे क्वार्टर में बराबरी गोल दागने का भरसक प्रयास किया।



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