वरिष्ठ कांग्रेस नेता और पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर आरोप लगाया कि फ्रांस के साथ हुए राफेल लडाकू विमान सौदे में उन्होंने रक्षा खरीद प्रकिया की कतई उपेक्षा की है। पी चिदंबरम ने यहां संवाददाता सम्मेलन में कहा कि मौजूदा केंद्र सरकार ने रक्षा सौदों से संबंद्ध सभी प्रकियाओं की उपेक्षा की है और इस सौदे के बारे में सभी सक्षम समितियों को भी अंधेरे में रखा है। उन्होंने इस पूरे मामले की जांच की मांग भी की है। उन्होंने पूछा कि आखिर केंद्र सरकार ने रक्षा खरीद प्रकिया की उपेक्षा क्यों की और निविदा मंत्रणा समिति तथा कीमत मंत्रणा समिति को अंधेरे में क्यों रखा गया।
पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने आरोप लगाया कि रक्षा मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति को भी भरोसे में नहीं लिया गया। पी चिदंबरम ने दावा किया कि इस सौदे के बारे में हर मंत्रालय, हर विभाग को अंधेरे में रखा गया और मोदी ने लडाकू विमान खरीद को सबको दरकिनार कर मंजूरी दे दी। उन्होंने कहा कि संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन सरकार के कार्यकाल में राफेल विमान का जो सौदा हुआ था उसके हिसाब से प्रत्येक राफेल विमान 526 करोड़ रुपए का था लेकिन मोदी सरकार के कार्यकाल में इस विमान की लागत बढ़कर 1670 करोड़ रुपए हो गयी है।
इसके अलावा मौजूदा सरकार के इस सौदे में कहीं भी तकनीकी हस्तांतरण का कोई जिक्र नहीं है। पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने कहा कि इस विमान सौदे में केंद्र सरकार ने काफी तेजी दिखाई थी और तीन वर्ष तथा चार माह गुजर चुके हैं लेकिन अब तक एक भी राफेल विमान देश में नहीं पहुंचा हैं। उन्होंने सवाल किया,’ लोग पूछ रहे हैं कि कहां हैं ये विमान।’ उन्होंने आरोप लगाया कि विमान की कीमतों, इनकी आपूर्ति और ऑफसेट सहयोगी के चयन में कोई पारदर्शिता नहीं बरती गई। माना जा रहा था कि यह आपातकालीन खरीद थी लेकिन ऐसी क्या आपात स्थिति है कि तीन वर्षों के बाद सितंबर में पहला राफेल विमान भारत आ रहा है जबकि इस मामले में 10 अप्रैल 2015 को समझौता हो गया था।’
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उन्होंने कहा कि देश की सार्वजनिक क्षेत्र की सबसे विश्वसनीय कंपनी हिंदुस्तान एयरोनाटिकल लिमिटेड(एचएएल) के स्थान पर एक निजी कंपनी का चुनाव कर सार्वजनिक क्षेत्र के साथ घोर अन्याय हुआ है क्योंकि वह युवाओं और पेशेवरों की सबसे बड़ नौकरी प्रदाता कंपनी है। उन्होंने कहा कि अगर फ्रांस की कंपनी दासाल्ट ने यह फैसला लिया था तो क्या निजी क्षेत्र की कंपनियों के मुकाबले केंद्र सरकार एचएएल के नाम पर जोर नहीं दे सकती थी जैसा संयुक्त प्रगतिशील गंठबंधन सरकार के समय किया गया था।
पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने कहा कि रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण का यह सबसे बड़ झूठ कि वह ‘ऑफसेट काँट्रेक्ट’ के बारे में कुछ नहीं जानती हैं, का पर्दाफाश फ्रांस के रक्षा मंत्री फ्लोरेंस पारले ने 27 अक्टूबर 2017 को उस समय कर दिया जब नागपुर में रिलायंस रक्षा कंपनी की आधारशिला के दौरान दोनों की मुलाकात हुई थी। नोटबंदी का जिक्र करते हुए कांग्रेसी नेता ने कहा कि यह काले धन को वैध बनाने की भारत सरकार की अब तक की‘सबसे बड़ और आकर्षक’ योजना थी। उन्होंने भारतीय रिजर्व बैंक की वार्षिक रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि नोटबंदी के बाद मात्र 10,720 करोड़ रुपए रिजर्व बैंक के पास नहीं पहुंचे।
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उन्होंने कहा कि देश में अभी भी धन की आपूर्ति की स्थिति सामान्य नहीं हो पायी है और एटीएम को हर समय धन माना जाता था लेकिन अब यह डेयरी कारोबार की तरह हो गया है कि दूध की आपूर्ति 10 बजे से 12 बजे तक ही रहेगी और मध्य प्रदेश में तो लोग यह भी कहने लगे हैं ‘ आएगी तो मिलेगी’। पिछले हफ्ते देश के विभिन्न हिस्सों से पांच मानवाधिकार कार्यकर्ताओं (तथाकथित शहरी नक्सली) की गिरफ्तारी से जुड़ मामले में उनकी प्रतिक्रिया पूछे जाने पर पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने कहा कि वह शहरी नक्सली जैसे वाक्य से इत्तेफाक नहीं रखते हैं और शहरी नक्सली जैसी कोई चीज नहीं है।
उन्होंने कहा कि वे वाम विचारधारा वाले बौद्धिक लोग और कार्यकर्ता हैं जो आदिवासियों तथा वंचित लोगों के उत्थान के लिए काम कर रहे हैं और दक्षिण पंथी विचार धारा के मजबूत विरोधी होने के कारण मौजूदा केंद्र सरकार उन्हें धमका रही है। उन्होंने कहा कि इन गिरफ्तारियों को लेकर सुप्रीम कोर्ट भी काफी गंभीर है और उसने भी पुलिस हिरासत की अनुमति नहीं दी है। इन लोगों की गिरफ्तारी के तीन दिनों के भीतर महाराष्ट्र पुलिस की तरफ से एक भी सबूत नहीं पेश किया जा सका है। पी चिदंबरम ने कहा कि यह अभिव्यक्ति की आजादी को कुचलने और किसी भी वैचारिक सोच की कुचलने की सरकार की दमनकारी नीति है।
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