Friday, August 23, 2019

ऐप बेस्ड कैब से दिल्ली आना-जाना है? हो सकती है मुश्किल

नई राजधानी में आधी रात से बिना रेडियो फ्रीक्वेंसी आईडी (RFID) टैग वाली कमर्शल गाड़ियों की एंट्री पर रोक के बाद शनिवार से ओला, उबर जैसी बेस्ड कैब्स की दिक्कतें बढ़ सकती हैं। खासकर ऐसी , जो एनसीआर से दिल्ली आती हैं या दिल्ली से एनसीआर जाती हैं। दरअसल, दिल्ली-एनसीआर को मिलाकर ऐप बेस्ड कैब ड्राइवर करीब 4.5 लाख हैं, ऐप बेस्ड कैब ड्राइवर असोसिएशन के प्रमुख कमलजीत गिल का दावा है कि इनमें से करीब 80 हजार को ही अभी टैग मिल सके हैं। जिनके पास टैग हैं, वे भी बॉर्डर क्रॉस करने के मूड में नहीं हैं, क्योंकि दिन में अगर वे चार-पांच बार भी टोल क्रॉस करेंगे तो उन्हें हर बार 100 रुपये एमसीडी टोल देना होगा। हालांकि साउथ एमसीडी के अडिशनल कमिश्नर (टोल टैक्स) रणधीर सहाय ने इस दावे को खारिज किया। सहाय ने कहा कि ट्रांसपोर्टर्स में यह भ्रम है कि वे जितनी बार टोल क्रॉस करेंगे, उतनी बार एमसीडी टोल देना होगा। टैक्सी या ऐप बेस्ड कैब ड्राइवरों से पहले की तरह ही दिन में एक ही बार एमसीडी टोल कटेगा, चाहे वे कितनी भी बार टोल क्रॉस करें। गिल का कहना है कि कैब ड्राइवर पिछले कई दिनों से RFID टैग खरीदने की कोशिश कर रहे हैं। लेकिन सभी जगह टैग लेने की लाइन इतनी लंबी है कि पूरे दिन खड़े रहने के बाद शाम को पता चलता है कि टैग खत्म हो गए। इन्हीं समस्याओं को लेकर ड्राइवर आंदोलन भी करने वाले हैं। सहाय ने बताया कि अभी तक 1.63 लाख टैग बिक चुके हैं। बिना टैग टोल पार, तो दोगुना जुर्माना अडिशनल कमिश्नर ने दावा किया कि RFID टैग का फायदा यह होगा कि टोल गेट पर पहले जहां 15-16 सेकंड में गाड़ी पार होती थी, अब 2-3 सेकंड ही लगेंगे। इससे वहां जाम नहीं लगेगा। शुक्रवार आधी रात से कमर्शल गाड़ियां बिना RFID टैग के टोल क्रॉस करेंगी तो एनवायनमेंट कंपनसेशन चार्ज का दोगुना जुर्माना देना होगा।


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