नई दिल्ली : गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने पाकिस्तान में आतंकी समूह जैश-ए-मोहम्मद के सबसे बड़े शिविर पर भारतीय लड़ाकू विमानों के बम गिराने के एक दिन बाद बुधवार को देश में विशेषकर पाकिस्तान के साथ लगती सीमा की सुरक्षा स्थिति की समीक्षा की। बैठक के दौरान देश में सुरक्षा स्थिति और सभी संवेदनशील जगहों पर सुरक्षा सुनिश्चित करने के बारे में एक विस्तृत ब्योरा दिया गया। बैठक में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल सहित अन्य लोग उपस्थित थे।
गृह मंत्रालय के एक अधिकारी ने बताया कि सिंह ने अधिकारियों को भारत-पाकिस्तान सीमा की निगरानी कर रहे सीमा सुरक्षाबल को उच्चतम स्तर तक की सतर्कता सुनिश्चित करने को कहा, ताकि सीमा पार से किसी भी दुस्साहस को नाकाम किया जा सके। बैठक में उपस्थित रहने वालों में केन्द्रीय गृह सचिव राजीब गाबा और खुफिया ब्यूरो के निदेशक राजीव जैन शामिल हैं।
अधिकारियों ने बताया कि भारत ने मंगलवार को पौ फटने से पहले बड़ी कार्रवाई करते हुए पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के सबसे बड़े शिविर को तबाह कर दिया जिसमें लगभग 350 आतंकवादी और उनके प्रशिक्षक मारे गए। पाकिस्तान ने पुलवामा आतंकी हमले के बाद इन आतंकवादियों को उनकी सुरक्षा के लिए इस शिविर में भेजा था। भारतीय वायुसेना का यह हमला अत्यंत त्वरित और सटीक था। सूत्रों ने बताया कि वर्ष 1971 के युद्ध के बाद भारतीय वायुसेना पहली बार पाकिस्तान में दाखिल हुई ।
विदेश सचिव ने यहां संवाददाताओं को बताया कि पाकिस्तान स्थित आतंकी गुट जैश ए मोहम्मद के बालाकोट में मौजूद सबसे बड़े प्रशिक्षण शिविर पर खुफिया सूचनाओं के बाद की गई यह कार्रवाई जरूरी थी क्योंकि आतंकी संगठन भारत में और आत्मघाती हमले करने की साजिश रच रहा था। गौरतलब है कि 14 फरवरी को पुलवामा में सीआरपीएफ के काफिले पर हुए हमले में 40 जवान शहीद हो गये थे। जैश ए मोहम्मद ने पुलवामा हमले की जिम्मेदारी ली थी।
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