Friday, December 25, 2020

जिसकी कुर्सी, उसकी थाली... सत्‍ता बदलते ही बदल जाता है गरीबों के निवाले का स्‍वाद

सियासतदानों ने गरीबों के निवाले की थाली का इस्‍तेमाल भी वोट बैंक की तरह किया। लोकप्रियता हासिल करने के लिए तमाम राजनीतिक दलों ने सार्वजनिक जगहों पर सस्ती दरों पर भोजन उपलब्ध कराने की सुविधा शुरू तो की लेकिन उनमें हमेशा से निरंतरता का अभाव रहा।

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