लखनऊ उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के घंटाघर क्षेत्र में (CAA) के खिलाफ लंबे वक्त से प्रदर्शन चल रहा था। दुनिया के साथ जब देश में ने दस्तक दी तो सवाल उठा कि क्या अब यह प्रदर्शन समाप्त हो जाएगा। हालांकि, यहां जमे प्रदर्शनकारी अपनी जगह से टस से मस नहीं हुए, जिसकी वजह से कोरोना के संक्रमण का खतरा लगातार बढ़ता जा रहा था। यूपी की योगी सरकार ने कोरोना के बढ़ते मामलों को देखते हुए लखनऊ समेत 15 जिलों को लॉकडाउन कर दिया। इसके बाद महिलाओं ने प्रदर्शन बंद कर दिया है और वे वापस लौट गई हैं। लंबे वक्त से लखनऊ के क्लॉक टॉवर के नजदीक CAA के खिलाफ प्रदर्शन करती महिलाएं जब कोरोना की दहशत से प्रदर्शन को तौबा कर गईं तो वहां अन्य क्षेत्रों जैसा सन्नाटा पसर गया। इसके साथ ही भीड़ को देखते हुए कोरोना वायरस के बढ़ते संक्रमण की आशंकाओं पर कहीं न कहीं लगाम कसती नजर आई। प्रदर्शनकारी महिलाओं के इस कदम से प्रशासन ने भी राहत की सांस ली है। सुजीत पांडेय से एनबीटी ऑनलाइन ने बात की। वह कहते हैं, 'मुझे एक पत्र मिला है, जिसमें महिलाओं ने कोरोना वायरस के बढ़ते मामलों को देखते हुए प्रदर्शन खत्म करने की जानकारी दी है।' लखनऊ कमिश्नर को लिखा खत बताया जा रहा है कि प्रदर्शनकारी कोरोना वायरस के खत्म होने के बाद एकबार फिर से प्रदर्शन शुरू कर सकते हैं। प्रदर्शनकारी महिलाओं ने अपना प्रदर्शन फिलहाल के लिए खत्म करने की जानकारी देते हुए लखनऊ के कमिश्नर सुजीत पांडेय को पत्र लिखा। पढ़ें: 'हम मंच को छोड़कर जा रहे हैं'महिलाओं ने पत्र में लिखा है, 'पिछले 66 दिनों से चल रहे सीएए, एनआरसी और एनपीआर के विरोध में प्रदर्शन को सभी महिलाओं की ओर से अचानक आए कोरोना जैसी महामारी से बचने के लिए अस्थायी तौर पर ये धरना स्थगित किया जा रहा है। जब भी कोरोना को लेकर सरकार का आदेश समाप्त हो जाएगा, हम अपनी जगह फिर से बैठ जाएंगे। हम सभी महिलाएं संकेत के रूप में अपने दुपट्टों को और बनाए हुए मंच को यथास्थिति में छोड़कर जा रहे हैं।'
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