नई दिल्ली दिल्ली की हिंसा में आईबी स्टाफ अंकित शर्मा के मर्डर के आरोपी पार्षद की तलाश में दिल्ली पुलिस अपराध शाखा खाक छान रही है। लेकिन बताया जा रहा है कि अभी उसके पैतृक गांव का दिल्ली पुलिस ने नहीं छुआ है। ताहिर हुसैन मूल रूप से यूपी के अमरोहा जिले के गांव पौरारा का रहने वाला है। पौरारा गांव थाना आदमपुर की पुलिस चौकी रैरा के इलाके में मौजूद है। आईएएनएस की रिपोर्ट के मुताबिक, आदमपुर थाने की प्रभारी ने बताया कि दिल्ली पुलिस ने अभी तक हमसे ताहिर के बारे में कोई संपर्क नहीं साधा है। बता दें कि अंकित शर्मा मर्डर केस में ताहिर के खिलाफ पुलिस ने एफआईआर दर्ज की थी जिसके बाद आम आदमी पार्टी (आप) ने उसे सस्पेंड कर दिया था। उधर, आदमपुर थाने के प्रभारी ने बताया, ' मेरे संज्ञान में दिल्ली पुलिस की टीम अभी तक हमारे इलाके में पहुंची भी नहीं है, क्योंकि अगर दिल्ली पुलिस की टीम ताहिर के पैतृक गांव पौरारा जाती, तो कानूनी रूप से वो स्थानीय थाने (आदमपुर) में आमद (लिखित इंट्री) और फिर गांव की रवानगी जरूर कराती।' थाना आदमपुर प्रभारी से बातचीत के बाद यह साबित हो गया है कि ताहिर हुसैन की तलाश में दिल्ली पुलिस अपराध शाखा की एसआईटी ने अभी तक उसके गांव को नहीं छुआ है। इसके पीछे वजह तमाम हो सकती है। क्या हमले के डर से छुप रहा है ताहिर ताहिर की तलाश में एसआईटी के उसके गांव न जाने से सवाल पैदा हो रहे हैं। आखिर इसके पीछे क्या वजह हो सकती है। कुछ समय पहले दिल्ली पुलिस के अडिशनल सीपी (क्राइम) एके सिंगला ने कहा था कि ताहिर हुसैन को 24-25 फरवरी की रात को बचाया गया था। लेकिन अब दिल्ली पुलिस के सूत्रों ने स्पष्ट किया है कि ताहिर हुसैन को रेस्क्यू नहीं किया गया था। कहीं वह प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से दिल्ली पुलिस के संपर्क में तो नहीं है। या घर के आसपास के विपरीत हालात के चलते अपनी सुरक्षा के लिए खुद के गायब होने की अफवाह फैला दी हो। उल्लेखनीय है कि दिल्ली पुलिस द्वारा बचाने के ताहिर के दावे पर दो तरह की बातें सामने आई हैं। गरीबी से लड़ते हुए पहुंचा दिल्ली, पैसा आते भूला गांव? बताया जाता है कि ताहिर का बचपन काफी गरीबी में बीता और करीब 20 साल पहले वह गांव छोड़कर दिल्ली भाग आया था। उसने मौके देखकर फर्नीचर बनाने का हुनर सीख लिया। और फिर उसने फर्नीचर फैक्टरी खोल डाली। उसने अपनी फैक्ट्री अपने गांव के लोगों को काम देने का फैसला किया था। 2017 में आम आदमी पार्टी (आप) के टिकट से निगम पार्षद का चुनाव लड़ा और जीत भी गया। 20 साल पहले गांव से दिल्ली नंगे पांव पहुंचे ताहिर हुसैन के पास चुनाव के वक्त 17 करोड़ की संपत्ति थी। दिल्ली में जब शानदार जिंदगी गुजरने लगी, तो ताहिर हुसैन धीरे-धीरे गांव को भूलने लगा। कुछ साल पहले गांव की पैतृक जमीन और पुश्तैनी मकान भी बेच आया।
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