मुंबई महानगर में जगह-जगह चल रहे निर्माण कार्यों से निकलने वाला कचरा परेशानी का कारण बन गया है। इस मलबे की प्रोसेसिंग नहीं हो पा रही है। इसके चलते श्वांस से संबंधित बीमारियों के मरीजों का यहां से गुजरना किसी सजा से कम नहीं है। इसके अलावा कई जगह नाले अवरुद्ध होने की बात भी कही गई है। ने प्रोसेसिंग के लिए जून 2018 में टेंडर निकाला था। करीब 14 महीना गुजर जाने के बाद भी किसी ठेकेदार ने इसमें दिलचस्पी नहीं दिखाई है। बीएमसी टेंडर की समय-सीमा 13 बार बढ़ा चुकी है। अंतत: बीएमसी ने इस टेंडर को दो हिस्सों में बांट दिया है। इसमें ठेकेदारों को कुछ रियायतें दिए जाने की बात कही गई है। टेंडर में किए इस बदलाव से प्रशासन को ठेकेदार मिलने की उम्मीद बढ़ी है। नई शर्तों के मुताबिक, मुंबई शहर और उपनगर के लिए 600 मीट्रिक टन का प्लांट लगाया जाएगा, जबकि पश्चिमी उपनगर के लिए 600 मीट्रिक टन का अलग प्लांट होगा। एक प्लांट के लिए बीएमसी 2 हेक्टेयर जमीन देगी। जबकि दूसरा प्लांट ठेकेदार अपनी जमीन पर भी लगा सकते हैं। बीएमसी को उम्मीद है कि शर्तों में छूट देने के बाद कई लोग आगे आएंगे। मलबे की प्रोसेसिंग करने के एवज में बीएमसी शुल्क का भुगतान करेगी। अभी बीएमसी डेब्रिज ऑन कॉल की सुविधा दे रही है, जहां लोग तय शुल्क देकर निर्माण कार्य से निकला मलबा दे सकते हैं। हालांकि, प्लांट न होने से यह मलबा डंपिंग ग्राउंड में ही भेजा जाता है। प्लांट लग जाने के बाद इस मलबे पर पुनर्प्रक्रिया हो सकेगी, जिससे डंपिंग ग्राउंड पर भार कम होगा। क्या है योजना इस योजना के तहत लोग एक फोन कॉल करेंगे और गाड़ी वहां पहुंचकर मलबा ले जाएगी। अवैध मलबा मिलने पर बीएमसी द्वारा पंचनामा कर इसे उठा लिया जाएगा। 1 मीट्रिक टन से कम मलबा होने पर लोग इसे तय स्थान पर पहुंचा सकते हैं, जिसके बाद उन्हें कोई शुल्क नहीं देना होगा। यदि लोग मलबा उठाने के लिए गाड़ी घर पर मंगाएंगे तो उन्हें इसके लिए शुल्क अदा करना होगा। प्रॉजेक्ट शुरू होने के बाद ठेकेदार द्वारा इस योजना का प्रचार-प्रसार भी किया जाएगा। ठेकेदार को प्लांट लगाकर मलबे से निर्माण कार्य की सामग्री बनानी है। इसका कुछ हिस्सा बीएमसी भी अपने कार्यों के लिए खरीद सकेगी। अवैध मलबा है चुनौती मुंबई में स्लम या फ्लैट की मरम्मत से बड़े पैमाने पर मलबा निकलता है। ज्यादातर लोग बीएमसी को जानकारी दिए बिना ही घरों में काम करते हैं। इसलिए वे बीएमसी की सुविधाओं का लाभ उठाने से कतराते हैं। ऐसे में जानकार इस समस्या का समाधान निकालने की जरूरत बता रहे हैं। अन्यथा अवैध रूप से फेंके गए मलबे को उठाने पर बीएमसी द्वारा ठेकेदार को पैसे देते रहने पड़ेंगे।
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