लखनऊ आखिर क्यों नहीं मिला इंसाफ? अलीगंज इलाके में रहने वाली अर्चना श्रीवास्तव ने अपने वॉट्सऐप पर भाई की फोटो लगाकर यह लाइन लिख रखी है। ऐसा उन्होंने इस लिए लिख रखा है क्योंकि संदिग्ध हालात में उनके भाई अंकित की मौत के मामले में दोबारा जांच शुरू होने के बाद भी मिलने की उनकी टूट चुकी है। अर्चना का आरोप है कि 31 अगस्त 2016 की रात अलीगंज में इंदिरानगरी, सेक्टर-सी इलाके में घर से निकले उनके भाई को अगवा करके हत्या कर दी गई। आरोप है कि वारदात इस लिए की गई क्योंकि अंकित का मोहल्ले में ही रहने वाले एक व्यक्ति के रिश्तेदार की बेटी से प्रेम था। युवती की शादी हो गई थी। इसके बावजूद वह अंकित से मिलती थी, जिसके चले युवती के परिवारवालों ने हत्या करने की धमकी दी थी। पीड़ित अर्चना और उनके परिवारवालों को जिन लोगों पर हत्या करने का शक है, वह खुलेआम घूम रहे हैं। पीड़ित परिवार के मुताबिक आरोपियों से पुलिस ने सख्ती के साथ पूछताछ नहीं की। जबकि संदेह के घेरे में आए लोगों को सब कुछ पता है। पीड़िता परिवार की मांग है कि आरोपी का नार्को टेस्ट करवाने के साथ ही मामले की जांच सीबीआई या किसी अन्य एजेंसी से करवाई जाए। फरेंसिक रिपोर्ट हत्या की ओर कर रही इशारा पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट अंकित की हत्या किए जाने की ओर इशारा कर रही है। फरेंसिक विशेषज्ञ के मुताबिक पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में सिर पर चोट लगने से मौत होने की बात सामने आई है। अंकित के शरीर पर पांच चोटों का जिक्र किया गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि सिर के पिछले हिस्से में सीधे हाथ पर मौजूद चोट देखने से ऐसा लग रहा है कि किसी भारी चीज से वार किया गया हो। माथे पर भी चोट की बात लिखी गई है। विशेषज्ञों के मुताबिक सिर और माथे पर मौजूद चोटें ट्रेन से गिरने से लगी, ऐसा नहीं लग रहा है। ट्रेन से गिरने पर एक ही तरफ चोट आती। इसके अलावा सीधे कंधे और दोनों हाथ पर चोटें हैं। परिवारवालों ने आशंका व्यक्त की है कि अंकित को बुरी तरह पीटा गया। इसके बाद उसे मृत समझ कर मलिहाबाद स्थित दिलावरनगर रेलवे स्टेशन के पास फेंक दिया गया। धमकी मिलने पर परिवारवालों को हुआ शक बहन अर्चना ने बताया कि 28 मार्च 2019 को मोहल्ले आरोपी पक्ष ने उन लोगों से झगड़ा किया। आरोपियों ने पीड़ित परिवारवालों के साथ घर में घुस कर मारपीट की थी। इस मामले में पीड़ित परिवार ने अलीगंज थाने में रिपोर्ट भी दर्ज करवाई थी। बहन अर्चना के मुताबिक झगड़े के दौरान आरोपियों ने उन लोगों को धमकी दी कि जिस तरह कुछ साल पहले अंकित को गायब करवा दिया, वैसे ही तुम लोगों को गायब करवा देंगे। आरोपियों की यह बात सुनने के बाद अर्चना व अन्य परिवारवालों ने अंकित के बारे में छानबीन दोबारा शुरू कर दी। जो काम पुलिस को करना चाहिए था, वह बहनों ने किया। पुलिस अंकित के बारे में पता करने में नाकाम रही थी। पुलिस ने हाथ खड़े कर दिए। फाइनल रिपोर्ट लगा दी, लेकिन बहनों ने अंकित के बारे में पता करने की ठान ली। परिवारवालों ने 1 अप्रैल 2019 को पुलिस रेकॉर्ड में मौजूद लावारिस शवों की फोटो देखी। परिवारवालों ने 31 अगस्त 2016 से फोटो देखनी शुरू की। पुलिस रेकॉर्ड में परिवारवालों ने 2 सितंबर 2016 को पोस्टमॉर्टम हाउस में खींची गई एक लावारिस शव की फोटो देखी। फोटो की पहचान परिवारवालों ने अंकित के रूप में की। अर्चना का कहना है कि आरोपियों ने ही उसके भाई की हत्या की है। हादसा साबित करने के लिए रेलवे लाइन के पास फेंका गया! अर्चना के मुताबिक अंकित की हत्या को हादसा साबित करने के लिए रेलवे लाइन के पास फेंक दिया गया। उन्होंने बताया कि खुद छानबीन करते हुए दिलावरनगर रेलवे स्टेशन गईं थीं। वहां उन्होंने उस व्यक्ति से मुलाकात की, जिसने अंकित को घायल अवस्था में 1 सितंबर 2016 को ऐम्बुलेंस में लिटाया। उसने अर्चना को बताया कि शरीर पर काफी चोटें थीं। अंकित के पैर झाड़ियों की तरफ थे, पास में ही एक आम का बाग भी था। उस व्यक्ति ने बताया कि अंकित के कपड़े फटे हुए थे। पैर में कुछ भी नहीं था। अर्चना के मुताबिक उनका भाई ट्रेन हादसे का शिकार हुआ होता तो, उसके कपड़े नहीं फटते। अंकित की चप्पल भी घटनास्थल के पास नहीं मिलीं। पुलिस रेकॉर्ड में मिली अंकित की फोटो में शर्ट फटी हुई दिखाई दे रही है। बहना का कहना है कि इससे साफ अंदाजा लगाया जा सकता है कि अंकित को बंधक बनाकर पीटा गया। इसके बाद उसे मरा समझ कर रेलवे ट्रैक के पास फेंक दिया गया, जिससे की हत्या को हादसा साबित किया जा सके। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट पर विशेषज्ञों से ली जाएगी सलाह इंस्पेक्टर अलीगंज फरीद अहमद के मुताबिक की मौत के मामले में जांच अभी चल रही है। परिवारवालों ने जो भी तथ्य प्रस्तुत किए थे, उनकी जांच की जा रही है। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट पर विशेषज्ञों और डॉक्टरों से सलाह ली जाएगी। उनसे पूछा जाएगा कि पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में लिखी गईं चोटें पीटने से आ सकती हैं या ट्रेन से गिरने से। फैक्ट फाइल 31 अगस्त 2016 को गायब हुआ 2 सितंबर 2016 गुमशुदगी दर्ज हुई अक्टूबर 2017 में फाइनल रिपोर्ट लगाई गई 17 अप्रैल 2019 को आईजीआरएस में शिकायत की 19 अप्रैल 2019 को कोर्ट में दोबारा जांच के लिए प्रार्थना पत्र दिया 21 अप्रैल 2019 को अंकित को अगवा करके हत्या करने और साक्ष्य मिटाने का आरोप लगाते हुए तहरीर दी 25 अप्रैल 2019 को कोर्ट ने दोबारा जांच के आदेश दिए
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