मुंबई मुंबई की बेस्ट बसों में सफर करने वाले यात्रियों की के लिए कंडक्डर के साथ रोज-रोज की बहसबाजी की कई कहानियां हैं। लेकिन किसी ने भी यह नहीं सोचा था कि किराये में कमी होते ही इस तरह की लड़ाइयां बिल्कुल खत्म हो जाएंगी। इतना ही नहीं, बस कंडक्टर अब यात्रियों से टिकट के बदले सिक्के न सौंपने की गुहार लगा रहे हैं और नोटों की मांग कर रहे हैं। बेस्ट ने बताया कि 9 जुलाई से संशोधित किराए के लागू होने के कुछ ही हफ्तों बाद सिक्कों में लगभग 4 लाख रुपये का डेली कलेक्शन तीन गुना होकर लगभग 12 लाख रुपये हो गया है। 10 साल से बेस्ट में सेवा दे रहे बस कंडक्टर संतोष ठाकुर ने बताया कि अब उन्हें सिक्के गिनने के लिए आधे घंटे का समय लग जाता है जबकि पहले 10 मिनट ही लगा करते थे। शर्ट और ट्राउजर में सिलवाईं एक्स्ट्रा पॉकेट संतोष के सहयोगी राजू दिनकर ने बताया कि उन्होंने अपने ट्राउजर में एक्स्ट्रा जेबें सिलवाई हैं क्योंकि सिक्कों की इतनी भारी संख्या खासकर 5 रुपये के सिक्के से उनकी जेब में छेद हो गए थे। संतोष कहते हैं, 'अब हम यात्रियों को खुशी-खुशी चेंज दे पाते हैं।' उधर, बेस्ट के अधिकारियों ने कहा, 'शर्ट और ट्राउजर की जेब में इतने सिक्के रखना असंभव हो गया है।' अधिकारियों ने बताया कि उन्हें इतनी संख्या में सिक्कों के निपटारे के लिए सोचने पर मजबूर होना पड़ा है, ऐसे में उन्होंने अपने कर्मचारियों का वेतन का कुछ हिस्सा सिक्कों में देना शुरू कर दिया है। डेली कलेक्शन बढ़कर 12 लाख रुपये हो गया बेस्ट कमिटी के चेयरमैन अनिल पटनकर ने बताया कि इस उपाय से स्थिति थोड़ी संभल रही है। उन्होंने बताया, 'पहले हमारे पास करीब 4 लाख रुपये तक के सिक्के होते थे लेकिन अब बढ़कर 12 लाख रुपये तक हो गए हैं। हमने इतने अधिक सिक्कों के निपटारे के लिए ट्रेडर, बैंक, कंडक्टरों और स्टाफ को सैलरी को सिक्के देने शुरू कर दिए हैं।' यात्रियों को भी अब शिकायत नहीं है। गोरेगांव निवासी शिवम कांबले ने कहा कि एक दो दिन पहले उन्होंने बस कंडक्टर को 100 रुपये का नोट दिया जिसके बदले में उन्हें 5 और 10 के सिक्के मिले। उन्होंने कहा, 'मैंने कुछ महीने तक एक बेस्ट बस में ऐसा होने की कल्पना तक नहीं की थी।' इस खबर को अंग्रेजी में पढ़ने के लिए यहां करें
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