देश की मायानगरी मुंबई में गरीबों के बच्चों की बोलियां लग रही हैं। चेंबूर क्राइम ब्रांच ने ऐसे बच्चों को खरीदने और बेचने वाले एक बड़े रैकिट का भंडाफोड़ किया है। डीसीपी अकबर पठान ने बताया कि इस केस में कुल छह लोग गिरफ्तार किए गए हैं। इनमें पांच महिलाएं हैं। क्राइम ब्रांच सूत्रों का कहना है कि इस रैकिट की मुख्य सरगना भाग्यश्री कोली है। उसने दो ग्रुप बनाए थे। पहले ग्रुप में उसके साथ ललिता उर्फ आशा जोसेफ नामक महिला थी, जबकि दूसरे ग्रुप में उसने सुनंदा मसाने व सविता सालुंखे को रखा था। सविता देवनार में एक अस्पताल में सिक्यॉरिटी गार्ड थी। उसे इस वजह से वहां आने वाली गर्भवती महिलाओं की डीटेल मिल जाती थी। इनमें जो बेहद गरीब महिलाएं होती थीं, उनके द्वारा बच्चों को जन्म देने के बाद एक सप्ताह या 15 दिन के अंदर सविता अपनी सहेली सुनंदा को उनके पास भेजती थी। एक ग्रुप करता था ग्राहकों की तलाश सुनंदा गरीब महिलाओं और उनके पतियों को इस बात के लिए आश्वस्त करती थी कि वह गरीबी की वजह से इन बच्चों की परवरिश यदि न कर पाएं, तो वह इनकी देखभाल करेगी। बदले में उन्हें एक से डेढ़ लाख रुपये कैश भी देगी। ये महिलाएं कभी भी अपने बच्चों को देख सकती हैं। जब बेहद गरीब परिवार इसके लिए तैयार हो जाता था, तब उस परिवार के साथ सुनंदा फर्जी अग्रीमेंट करती थी। भाग्यश्री कोली और ललिता उर्फ आशा जोसेफ वाला जो दूसरा ग्रुप था, वह उन ग्राहकों की तलाश करता था, जिन्हें बच्चों की जरूरत होती थी। इंस्पेक्टर चंद्रकांत दलवी, आबूराव सोनावणे और अर्पणा जोशी को कहीं से दो ग्राहकों भिवंडी के अमर देसाई और कल्याण की भाग्यश्री कदम के बारे में पता चला कि इन दोनों ने किसी से गरीबों के लड़के खरीदे हैं। इसके बाद दोनों को गिरफ्तार किया गया और उनसे पूछताछ के बाद पूरे रैकिट का भंडाफोड़ हुआ। गहने बेचकर गैंग से बच्चा खरीदाजांच में पता चला कि अमर देसाई को तीन बेटियां थीं और उसे एक लड़का चाहिए था। उसने अपनी टैक्सी और आभूषण बेचकर व मकान गिरवीं रखकर इस गिरोह को 3 लाख 85 हजार रुपये दिए। भाग्यश्री कदम के कोई भी बच्चा नहीं था। उसने ढाई लाख रुपये में इस गैंग से 15 दिन का लड़का खरीदा।
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