आरोप के मुताबिक परियोजना के क्रियान्वयन के दौरान कंपनी धोखाधड़ी पूर्ण कारोबार में लिप्त हो गई और कई संदिग्ध लेनदेन किए। 31 दिसंबर 2015 तक कंपनी का लोन अकाउंट गैर निष्पादित संपत्तियों (एनपीए) में तब्दील हो गया था जिस पर करीब 1285.45 करोड़ रुपये बकाया थे।from Jagran Hindi News - news:national https://ift.tt/3cJPTfs
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