Wednesday, January 22, 2020

KGMU: हार्ट सर्जरी में दें डॉक्टर के गाउन का भी पैसा

लखनऊ में दिल के मरीजों को अब ऑपरेशन करवाने के लिए डॉक्टर और नर्स के गाउन का खर्च भी उठाना होगा। लारी में ऑपरेशन करवाने वाले सभी मरीजों को लगभग तीन से पांच सर्जिकल गाउन का पैसा देना होगा। इससे मरीजों पर डेढ़ से दो हजार रुपये का अतिरिक्त भार आ जाएगा। अब तक इसका खर्च केजीएमयू खुद ही उठाता था। वीसी प्रो. एमएलबी भट्ट के अप्रूवल के बाद ही यह आदेश जारी किया गया है। हालांकि केजीएमयू के ही दूसरे विभागों में होने वाली सर्जरियों में मरीजों से गाउन का पैसा नहीं लिया जाएगा। लारी कॉर्डियॉलजी में 76 बेड हैं। विभाग में एंजियोग्राफी, एंजियोप्लास्टी, वॉल्व प्रत्यारोपण, वॉल्व में सिकुड़न दूर करने और पेसमेकर लगाने समेत कई तरह की सर्जरियां की जा रही हैं। वर्तमान में हर दिन 35 से 40 ऑपरेशन होते हैं। ऑपरेशन से पहले मरीज समेत सर्जरी में शामिल सभी डॉक्टरों व कर्मचारियों को गाउन पहनना होता है। एक गाउन एक ऑपरेशन में ही काम आता है। ऑपरेशन के बाद गाउन को नष्ट कर दिया जाता है। ताकि संक्रमण न फैले। गाउन की अलग रसीद मिलेगी लारी के प्रवक्ता डॉ. अक्षय प्रधान ने बताया कि एंजियोप्लास्टी और पेसमेकर इंप्लांट जैसे प्रॉसिजर के लिए मरीजों से एक लाख से 70 हजार रुपये तक जमा करवाए जाते हैं। इस रकम की मरीजों को बाकायदा रसीद भी दी जाती है। अब इसी फीस के साथ गाउन के पैसे भी लिए जाएंगे और उसकी अलग रसीद दी जाएगी। हालांकि आयुष्मान योजना, बीपीएल कार्ड धारक, केंद्र व प्रदेश सरकार की योजनाओं के तहत भर्ती होने वाले मरीजों के लिए कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा। इन मरीजों के केस में गाउन का चार्ज भी नहीं लिया जाएगा। 'दूसरे विभागों से तुलना ठीक नहीं' दूसरे विभागों में मरीजों से गाउन का खर्च पर न लिए जाने पर केजीएमयू के प्रवक्ता संदीप तिवारी का कहना है कि दूसरे विभागों में सर्जरी पांच हजार रुपयें में हो जाती है। कुछ में तो हजार रुपये ही जमा होते हैं। लारी में 60 से हजार से लेकर लाखों रुपये तक लगते हैं, जो मरीज इतने पैसे दे रहा है उसके लिए गाउन का खर्च क्या है? बाकी जो गरीब हैं उनका तो वैसे भी मुफ्त इलाज होता है। ऐसे में दोनों में तुलना नहीं हो सकती। 9 ट्रांसप्लांट में खा गए 4.70 लाख रुपये का खाना केजीएमयू में हुए 9 लिवर ट्रांसप्लांटों में डॉक्टरों की टीम ने 4.70 लाख रुपये का खाना खा डाला। गैस्ट्रोसर्जरी विभाग की ओर से वित्त विभाग को बिल भेजा गया तो अफसरों के कान खड़े हो गए। आनन-फानन में एक कमिटी बनाई गई और तय मानकों के हिसाब से कटौती कर बिल पास कर दिया गया। केजीएमयू में होने वाले लिवर ट्रांसप्लांट के लिए दिल्ली के मैक्स अस्पताल से 6 से 9 डॉक्टरों की टीम आती है। खाने के लिए कैटरर्स लगाया जाता है। सूत्रों के मुताबिक बिलों में खाने वालों की संख्या में भी काफी असमानता मिली है। वित्त अधिकारी मो. जमा ने बताया कि केजीएमयू में प्रति प्लेट भोजन का रेट तय है। उसी हिसाब से तीन लाख पांच हजार रुपये का बिल पास किया गया है।


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