जेएनयू की एसोसिएट प्रोफेसर मौसमी बसु कहतीं हैं कि पहले भी चीन और पाकिस्तान के विद्वानों को बुलाने से पूर्व अनुमति लेनी पड़ती थी। लेकिन यदि अब सभी के लिए अनुमति लेनी होगी तो ऐसे तो शैक्षणिक गतिविधियां प्रभावित होंगी।from Jagran Hindi News - news:national https://ift.tt/3qPVHIQ
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