लखनऊ लखनऊ विकास प्राधिकरण ()से स्कैनिंग के लिए भेजी गईं करीब 23 हजार फाइलें गायब हो गई हैं। इस मामले में स्कैनिंग करने वाली कंपनी राइटर के खिलाफ मंगलवार को गोमतीनगर थाने में दर्ज करवाई गई। एफआईआर के मुताबिक, ने 1,45,449 फाइलें स्कैनिंग के लिए दी थीं, लेकिन अब कंपनी सिर्फ 1,22,000 फाइलें होने की बात कह रही है। इसमें भी सिर्फ 49,846 फाइलें ही स्कैन हुई हैं और कई फाइलों के पन्ने फटे हैं या गायब हैं। एलडीए ने 10 फरवरी 2017 को राइटर कंपनी के साथ फाइल स्कैनिंग के लिए अनुबंध किया था। इसके बाद कंपनी के कर्मचारी एलडीए के लालबाग स्थित कार्यालय और गोमतीनगर मुख्यालय से फाइलें ले गए। एग्रीमेंट के मुताबिक, सारी फाइलें 10 जून 2017 तक स्कैन कर दी जानी थीं, लेकिन कंपनी अभी तक सिर्फ 49,846 फाइलें स्कैन कर सकी हैं। महीनों से भटक रहे आवंटी फाइलें गायब होने के कारण जरूरत पड़ने पर फाइल या दस्तावेज की कॉपी मांगने वाले आवंटियों को एलडीए के बाबू तारीख पर तारीख दे रहे हैं। जानकारी के मुताबिक, मांगने के बावजूद कंपनी की ओर से फाइलें नहीं दी जातीं। विरोध के बावजूद कर दिया था टेंडर एलडीए की फाइलें निजी कंपनी के कार्यालय में भेजने पर कर्मचारी संघ ने विरोध किया था। उस वक्त संघ अध्यक्ष शिव प्रताप सिंह ने इसे बड़ा घोटाला बताते हुए वीसी, कमिश्नर और प्रमुख सचिव को पत्र भी लिखा था, लेकिन इन आपत्तियों को दरकिनार कर तत्कालीन वीसी सत्येंद्र सिंह ने हजारों फाइलें कंपनी के हवाले कर दीं।
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